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Haryana Weather: हरियाणा में बारिश ने तोड़े सभी रिकॉर्ड! सिरसा और हिसार में जल प्रलय, यमुनानगर सूखा

Satyakhabarindia

Haryana Weather: हरियाणा के सिरसा जिले में जुलाई 2025 के पहले पखवाड़े में जो बारिश हुई उसने मौसम वैज्ञानिकों तक को हैरान कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सिरसा में सामान्य से 908% अधिक बारिश दर्ज की गई है। यह आंकड़ा न सिर्फ राज्य में बल्कि पूरे उत्तर भारत में सबसे अधिक है। सिरसा जैसे शुष्क क्षेत्र में इतनी भारी बारिश से कई गांवों में पानी भर गया और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं और सड़कों पर नाव चलाने जैसी स्थिति बन गई।

यमुनानगर में आसमान ने किया मुंह मोड़ा

जहां सिरसा में बादल खूब बरसे वहीं यमुनानगर जिले ने निराश किया। यहां जुलाई महीने में सामान्य से 96% कम बारिश हुई है। यह हरियाणा का सबसे कम बारिश वाला इलाका रहा। किसानों को सबसे ज़्यादा नुकसान यहीं हुआ है क्योंकि बारिश की कमी से खेतों में सूखापन फैल गया है और धान की बुवाई तक नहीं हो सकी। नहरों और तालाबों का जलस्तर गिर गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है।

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हिसार में भी रिकॉर्डतोड़ पानी की बरसात

हिसार जिले ने भी बारिश के मामले में रिकॉर्ड बनाए हैं। यहां सामान्य से 499% अधिक वर्षा हुई है। इतनी बारिश एक साथ होने से शहर की सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में पानी घुस गया। कई स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा और प्रशासन को राहत शिविर लगाने पड़े। किसानों को फायदा तो हुआ लेकिन अचानक आई बारिश ने कहीं-कहीं फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

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मौसम का यह असमान व्यवहार क्यों

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की असमान बारिश का कारण जलवायु परिवर्तन है। एक ओर कहीं बादल जमकर बरस रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ जिले पूरी तरह सूखे पड़े हैं। पश्चिमी विक्षोभ, अरब सागर से उठे मानसूनी बादल और स्थानीय तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव इस असमानता की वजह बन रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में ऐसी असंतुलित बारिश की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

क्या सरकार है तैयार ऐसे हालात के लिए

बारिश की यह असमानता प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। सिरसा और हिसार जैसे जिलों में जहां बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है वहीं यमुनानगर में सूखा पड़ रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को जल प्रबंधन, आपदा राहत और कृषि सहायता की योजनाओं को नए सिरे से बनाना होगा। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और मौसम पूर्वानुमान तंत्र को मजबूत करने की ज़रूरत है ताकि समय रहते हालात पर काबू पाया जा सके।

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